मुस्कुराते हैं हम, मगर अंदर से वीराने।
फिर तुझे ढूंढने मेरी आँख के आँसू निकले.
कि हम किसी के लिए हमेशा ख़ास नहीं रह सकते..!!
तो फिर इस बीमारी की दवा क्यों नहीं मिलती?
दरख़्त-ए-नीम हु मै मेरे नाम से घबराहट हो गई,
और जो प्यार की क़द्र करता है, उससे कोई प्यार नहीं करता।
लड़कों का दर्द हमेशा छुपा रहता है नज़रों पर।
वो कितना अपना था और हम कितने अकेले हैं।
अरे खा गई हैं मुझको उसकी यादें… दिन-रात वही सताती हैं।
इंसान सिर्फ एक कारण से अकेला पड़ जाता हैं,
अपना बनाकर फिर कुछ दिनों में बेगाना कर दिया,
कि अब किसी और पर भरोसा करना मुश्किल हुआ।
उसे जाना था, हमने भी दिल पर पत्थर रखकर जाने दिया,
कभी–कभी अपने ही सवालों में Sad Shayari in Hindi इतना उलझ जाता हूँ,